क्या है पूरा प्रोजेक्ट?
केंद्र की कैबिनेट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से जुड़ी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन पर कुल ₹4,254 करोड़ खर्च होंगे।
| परियोजना | लंबाई | अनुमानित लागत |
|---|---|---|
| कटनी–पेंड्रा रोड चौथी लाइन | 201 किमी | ₹2,975 करोड़ |
| बिलासपुर (उसलापुर)–पेंड्रा रोड तीसरी लाइन | 87 किमी | ₹1,279 करोड़ |
| कुल | 288 किमी | ₹4,254 करोड़ |
इन दोनों परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
🚉 छत्तीसगढ़ को क्या फायदा होगा?
बिलासपुर–पेंड्रा रोड सेक्शन में तीसरी लाइन बनने से इस व्यस्त रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ कटनी–पेंड्रा रोड पर चौथी लाइन बनने से ट्रेनों के संचालन में अधिक लचीलापन मिलेगा।
इसका सीधा फायदा बिलासपुर, अनूपपुर, शहडोल और आसपास के क्षेत्रों को मिल सकता है। नई लाइनें बनने के बाद मौजूदा ट्रैक पर दबाव कम होने और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारू होने की उम्मीद है।
🚆 क्या नई ट्रेनें भी चलेंगी?
परियोजनाओं का प्रमुख उद्देश्य रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना और congestion कम करना है। क्षमता बढ़ने से भविष्य में नई यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए भी अतिरिक्त गुंजाइश बनने की उम्मीद है। साथ ही मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक प्रभावी हो सकेगी।
📦 उद्योग और माल परिवहन को फायदा
यह रेल कॉरिडोर केवल यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। क्षेत्र में कोयला, सीमेंट, लोहा-इस्पात और अन्य औद्योगिक माल की आवाजाही भी महत्वपूर्ण है। मल्टी-ट्रैकिंग से माल परिवहन की क्षमता बढ़ने और लॉजिस्टिक्स में सुधार की उम्मीद है।
🌄 पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से अमरकंटक, बांधवगढ़, अचानकमार और खुटाघाट जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। इससे पर्यटन गतिविधियों के साथ स्थानीय रोजगार और कारोबार को भी लाभ मिल सकता है।
📊 बड़ी तस्वीर
यह परियोजना केंद्र द्वारा मंजूर किए गए बड़े ₹20,804 करोड़ के आठ मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे प्रोजेक्ट्स के पैकेज का हिस्सा है। इनमें से MP और छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों में तीन परियोजनाओं की कुल लागत ₹10,783 करोड़ है और लगभग 656 किमी अतिरिक्त रेल ट्रैक जोड़े जाएंगे।


